मैदान

मैदान 

सामान्यतः सागर तल से 150 मी. तक ऊँचे किन्तु समतल तथा विस्तृत खण्ड को मैदान की संज्ञा दी जाती है। मैदान का ऊपरी धरातल सपाट तथा समतल होता है। द्वितीय श्रेणी के उच्चावच में मैदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। संपूर्ण विश्व के 41% भू-भाग पर मैदान का विस्तार है। कुछ मैदान अपेक्षाकृत अधिक ऊँचे तथा कुछ समुद्रतल से नीचे भी हो सकते हैं।

मैदान का वर्गीकरण

1. संरचनात्मक मैदान:- 

संरचनात्मक मैदानों का निर्माण पृथ्वी की अन्तर्जात शक्ति के कारण हुआ है। भूपटल में उत्थान तथा अवतलन या सागरीय स्थलखण्ड के निर्गमन या निमज्जन के कारण इन मैदानों का निर्माण हुआ है। यू.एस.ए. में ग्रेटप्लेटन तथा अटलाण्टिक तटीय मैदान व भारत में पूर्वी तटीय मैदान संरचनात्मक मैदान के उदाहरण हैं।

 2. अपरदनात्मक मैदान:-

अपरदनात्मक मैदान के निर्माण में अपरदन के दूतों की प्रमुख भूमिका होती है। अपरदन के दूत (जल, हिमानी, वायु आदि) स्थलखण्ड की विषमताओं को अपरदन द्वारा एक सपाट तथा आकृति विहीन मैदान में परिवर्तित कर देते हैं।

अपरदनात्मक मैदान निम्न हैं-

 नदी निर्मित अपरदनात्मक मैदान:-

नदी अपरदन द्वारा निर्मित मैदान को पेनीप्लेन कहा जाता है। नदियाँ अपने अपरदन चक्र की अन्तिम अवस्था में उच्च स्थलखण्ड का अपरदन का समतल कर देती हैं। इस तरह से निर्मित मैदान को पेनीप्लेन या समप्राय मैदान कहते हैं। इस मैदान में यत्र-तत्र चट्टानों के अवशेष को मोनाॅडनाक कहते हैं। मूल रूप से समप्राय मैदान के उदाहरण कम हैं किन्तु उत्थित समप्राय मैदान के उदाहरण अनेक हैं। जैसे-भारत का छोटा नागपुर क्षेत्र, यू.एस.ए. का अप्लेशियन क्षेत्र एवं मिसीसिपी घाटी आदि।

 हिम निर्मित अपरदनात्मक मैदान:-

हिमानी अपने क्षेत्रों में उच्च भाग का अपरदन कर उसे सपाट किन्तु उच्चावच युक्त मैदान में परिवर्तित करती है। हिमानी अपरदित मैदान में घाटियाँ चैड़ी होती हैं। इस प्रकार के मैदान उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग तथा भारत के लद्दाख में स्थित हैं। इस प्रकार के मैदान में मिट्टी की परत पतली होती है एवं मैदान में चट्टानी टीले तथा झीलें दृश्यगत होती हैं।

 पवन निर्मित अपरदनात्मक मैदान:-

शुष्क एवं अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पवन की अपरदन क्रिया द्वारा निर्मित मैदान को पेडीप्लेन कहते हैं। इस मैदान में स्थित चट्टानी टीलों को इंसेलबर्ग कहते हैं। सहारा के रेग, सेरिर तथा हमादा इस तरह के मैदान के उदाहरण हैं।

  कास्र्ट मैदान:-

चूना पत्थर के क्षेत्रों में भूमिगत जल की भूमितल जल की घुलन क्रिया द्वारा निर्मित मैदान को कास्र्ट मैदान कहते हैं। इस तरह के मैदान पूर्ववर्ती यूगोस्लाविया के कास्र्ट प्रदेश, यू.एस.ए. के फ्लोरिडा, यूकाटन, भारत में चित्रकूट, रामगढ़ तथा अल्मोड़ा में दिखाई पड़ते हैं।

3. निक्षेप जनित मैदान:-

अपरदन के विभिन्न दूतों द्वारा निक्षेपित मैदानों की अलग-अलग विशेषताएँ हैं। अपरदन के इन दूतों में नदी तथा वायु द्वारा निक्षेप से निर्मित मैदान अधिक महत्वपूर्ण है। निक्षेपात्मक मैदान निम्न हैं-

 नदी द्वारा निक्षेपित मैदान:-

नदी के निक्षेप से निर्मित मैदानों को जलोढ़ मैदान कहते हैं। स्थिति के आधार पर जलोढ़ मैदान को गिरिपद जलोढ़ मैदान, बाढ़ का मैदान व डेल्टा मैदान में वर्गीकृत किया जाता है। नदियाँ जब पर्वतीय भागों से नीचे उतरती हैं, तो कंकड़, बालू, पत्थर आदि का निक्षेपण पर्वतपदीय क्षेत्रों में करती हैं। इससे जलोढ़ पंख का निर्माण होता है। कई जलोढ़ पंखों के आपस में मिलने से गिरिपद जलोढ़ मैदान का निर्माण होता है। गिरिपद जलोढ़ मैदान के अंतर्गत भाबर व तराई क्षेत्र आते हैं। नदियाँ अपने मध्य एवं निम्न मैदारी भागों में बाढ़ के मैदान का निर्माण करती हैं। बाढ़ के मैदान को बांगर व खादर में वर्गीकृत किया जाता है। डेल्टा मैदान का निर्माण नदियों द्वारा अपने मुहाने पर अवसादों के निक्षेपण से होता हैं। गंगा एवं ब्रह्म का डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।

नदी द्वारा निक्षेपित मैदान का वर्गीकरण

गिरिपद जलोढ़ मैदान     बाढ़ का मैदान डेल्टा मैदान

  • भाबर:

पर्वतपदीय प्रदेशों में बड़े-बड़े टुकड़ों के ढेर से निर्मित क्षेत्र को भाबर कहते हैं जहाँ नदियाँ अदृश्य हो जाती हैं।

  •  तराई:-

भाबर के दक्षिण में स्थित संरचना जहाँ नदियों का जल पुनः सतह पर प्रकट होता है।

  •  बांगर:-

बाढ़ के उच्च भागों में जहाँ बाढ़ का जल नहीं पहुँचता है।

  •  खादर:-

खादर क्षेत्र में बाढ़ का जल प्रतिवर्ष पहुँचकर नवीन काँप मिट्टी का निक्षेप करता है। चार:-डेल्टा के ऊँचे भाग को चार कहते हैं।

  •  बील:-

डेल्टा के निचले भाग को बील कहते हैं। इस क्षेत्र में पानी हमेशा रहता है।

 हिमानी द्वारा निक्षेपित मैदान:-

हिमानी द्वारा निक्षेपित मैदान को हिमानीकृत मैदान कहा जाता है। उत्तरी पश्चिमी यूरोप तथा उत्तरी यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका में प्लीस्टोसीन हिमाच्छादन के कारण निर्मित हिमानी मैदान मिलते हैं। ये मैदान ऊबड़-खाबड़ तथा दलदली होने के कारण कृषि के लिए सर्वथा अनुपयुक्त होते हैं।

  पवन द्वारा निक्षेपित मैदान:-

मरुस्थलीय भागों में पवन यांत्रिक अपक्षय द्वारा बालूका-पत्थर को विघटित व वियोजित करके उड़ाकर अन्यत्र क्षेत्रों में निक्षेपित करती है जिससे मैदान का निर्माण होता है। पवन द्वारा निक्षेपित मैदान को रेतीला तथा लोयस मैदान में वर्गीकृत किया जाता है। अफ्रीका में सहारा, भारत में थार रेतीले मैदान के उदाहरण है, चीन का लोयस का मैदान पवन द्वारा निक्षेपित मैदान है।

  सरोवरीय मैदान:-

जब नदी किसी झील में अपना जल प्रवाहित करती है तो प्रवाहित होने के क्रम में अवसादों का निक्षेपण झीलों में करती है जिससे झीलों की तली उथली हो जाती है तथा झील के भरने से सपाट मैदान का निर्माण होता है। यदि झील की तली का पृथ्वी की अन्तर्जात शक्ति के कारण उत्थान हो जाता है तो इस प्रक्रिया से भी सरोवरीय मैदान का निर्माण होता है

लावा मैदान:- 

यह अपरदन के दूतों से भिन्न ज्वालामुखी उद्गार से निःसृत लावा के पतली चादर के रूप में निक्षेपित हो जाने से निर्मित होता है। फ्रांस, न्यूजीलैंड, यू.एस.ए. तथा अर्जेन्टीना में अनेक लावा के मैदानों का निर्माण हुआ है। लावा मैदान की काली मिट्टी कृषि के लिए उपयुक्त होती है।

विश्व के प्रमुख मैदान 

  • क्वांटो मैदान:-

जापान के होंशू द्वीप के पूर्वी भाग में स्थित अत्यधिक उपजाऊ मैदान, प्रमुख औद्योगिक प्रदेश जहाँ, टोक्यो, कावाशाकी व याकोहामा जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं।

  • किंकी व तोंची/तोगची मैदान:-

होंशू द्वीप में स्थित उपजाऊ जलोढ़ प्रमुख औद्योगिक प्रदेश।

  •  मंचूरियन मैदान:-

उ0पू0 चीन में स्थित उपजाऊ जलोढ़ मैदान।

  •  ह्वांगहो का मैदान:-

ह्वांगहो नदी के जलोढ़कों से निर्मित पीली पीली मिट्टी का मैदान, चावल का मैदान, चावल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।

  •  यांगटीसीक्यांग मैदान:-

यांगटीक्यांग नदी घाटी मेें उपजाऊ जलोढ़ मैदान, चावल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।

  •  मीनांग-मेकांग घाटी:-

कंबोडिया में स्थित विशाल जलोढ़ मैदान,चावल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।

  • इरावदी का मैदान:-

म्यांमार के इरावदी नदी का घाटी में स्थित, चावल के लिए प्रसिद्ध।

  •  गंगा ब्रम्हपुत्र का मैदान:-

भारत व बांग्लादेश में स्थित खादर मिट्टी की प्रमुखता युक्त विशाल जलोढ़ मैदान चावल उत्पादन के लिए विख्यात।

  •  सिंधु-सतलज का मैदान:

भारत व पाकिस्तान में स्थित जलोढ़ मैदान बांगर मिट्टी से निर्मित गेहॅू उत्पादन के लिए विख्यात।

  • मरे-डार्लिंग का मैदान:-

आॅस्टेªलिया के पूर्वी भाग में मरे-डार्लिंग नदी द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान उत्पादन के लिए विख्यात।

  • डाउन्स मैदान:-

आॅस्टेªलिया में शीतोष्ण काटिबंधीय घास का मैदान भेड़ पालन क्षेत्र।

  •  हंगरी का मैदान:-

कारपेथियन व डिनारिक पर्वत के मध्य उपजाऊ मैदान।

  •  लोम्बार्डी का मैदान:-

इटली के उत्तरी भाग में स्थित, यूरोप का सर्वाधिक चावल उत्पादक क्षेत्र प्रमुख औद्योगिक प्रदेश।

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